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Thursday, 19 December 2013

शान ज्यों माणिक मुक्ता

कुण्डलियां

कुत्ता  प्यारा  जीव  है,  वफादार  बलवान।
घर की रक्षा नित करे, रख पौरूष अभिमान।।
रख पौरूष अभिमान, गली  का  शेर  कहाए।
चोर  और  अंजान,  भाग कर  जान बचाएं।।
द्वार रहे गर श्वान, शान ज्यों माणिक मुक्ता।
पर मानव मक्कार, अहम वश कहता कुत्ता।।

के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

Sunday, 13 October 2013

निर्गुन

                                                         
 निर्गुन



रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।

नगर का शोर छोड़ कर ध्याउ,
जहा बजे शंख और ढोल।
रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।1

प्यार का घर ममता सब त्यागू,
फसू मनिदर और दरगाह।
रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।2

पाहन पूजू गिरि पर चढि़-चढि़,
भूखा रहू दिन और रात।,
रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।3

दर-दर ढ़ूढू नगर-सगर में,
ढूढू वन और रेगिस्तान।,
रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।4

सत्यम शिव मन में निहित है,
छोड़ो द्वेष और अभिमान।
रे सजनी! तुझ बिन चैन कहा।5


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